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बीहड़ में नई दहशत : ठोकिया का झोला उठाने वाला गौरी डकैत 10 साल बाद लौटा, जानिए क्राइम-हिस्ट्री

लंबे समय से अंडरग्राउंड चल रहे डकैत गौरी यादव ने एक दिन पहले चित्रकूट के जंगलों में पहुंचकर चौतरफा फायरिंग करके दहशत फैला दी है। उसने सरैया चौकी क्षेत्र अंतर्गत गड़ा कझार के जंगल में चल रहे वृक्षारोपण कार्यक्रम में फायरिंग कर अपने लौटने की खबर दी। गौरी अपने गैंग के साथ पहुंचा। मजदूरों के साथ मारपीट कर फायरिंग की।

पुलिस ने बहिलपुरवा थाना (चित्रकूट) के बिलहरी गांव के जिस गौरी को ददुआ और ठोकिया के खिलाफ खड़ा किया था, वह अब पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। कई बार अंडरग्राउंड रहने के बाद 1.5 लाख का इनामी गौरी फिर लौट आया है।

एक वक्त था जब उत्तर प्रदेश की धर्मनगरी चित्रकूट में शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ और अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया का आतंक था। साल 2008 में ददुआ को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया, फिर कुछ ही दिन में ठोकिया भी मारा गया।

साल 2009 में खूंखार शंकर केवट के शागिर्द धनश्याम केवट को पुलिस ने मौत के घाट उतारा था। धनश्याम केवट का एनकाउंटर 52 घंटे चला, जो देश का सबसे बड़ा शूटआउट था। चित्रकूट के जंगल (बीहड़) में राज करने वाले डाकुओं को मारने के बाद अब गौरी उर्फ उदयभान यादव मुश्किलें खड़ी कर रहा है।

2005 में अलग गैंग बनाया
साल 2001 से गौरी डकैती सीख रहा था। गौरी ने साल 2005 में अपना अलग गैंग बनाकर वारदात को अंजाम देना शुरू किया। ददुआ व ठोकिया की मौत के बाद साल 2009 में बांदा पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया। लेकिन, दो साल बाद वह जमानत पर बाहर आ गया।

इन वारदातों को दिया अंजाम

  • 16 मई 2013 में बलिपुरवा गांव में दिल्ली से एक मामले की जांच करने आए दारोगा भगवान शर्मा की हत्या कर दी।
  • 2015 में गौरी यादव ने बिलहरी निवासी लवलेश यादव का अपहरण कर हत्या कर दी।
  • 2016 में लुड़वारा निवासी पप्पू के साथ दो लड़कों की गोली मारकर हत्या की।
  • मई 2016 में गोपालगंज में बिलहरी गांव के तीन ग्रामीणों को बिजली के खंभे में बांधकर गोली मार दी।
  • 2017 में अपने ही ग्राम पंचायत के अपने विरोधी को कुलुवा जंगल में जिंदा जलाया।
  • 2018 में सतना – चित्रकूट मार्ग पर ठेकेदारों के मुंशी और मजदूरों के साथ मारपीट व रंगदारी मांगना।
  • 16 मई 2020 को मध्यप्रदेश के मझगवां थाना क्षेत्र में चौकी लाल कोरी पुत्र बेला कोरी से रंगदारी मांगी।
  • मार्च 2021 में तेंदूपत्ता तोड़ने वाले मजदूरों की पिटाई का ठेकेदार से रंगदारी मांगी।

गौरी की पुलिस से मुठभेड़

  • 30 अक्टूबर 2015 में गौरी डकैत प्रचार प्रसार कर रहा था, तभी बहिलपुरवा के जंगल में पुलिस से डकैत गौरी की आमने सामने मुठभेड़ हुई। इस बीच 20 मिनट तक गोलियां बरसाई गई और गौरी पुलिस को चकमा देकर जंगल में गायब हो गया।
  • इसके बाद 9 मई 2019 को गौरी और सतना पुलिस की आमने सामने मुठभेड़ हुई थी उस समय तत्कालीन एसपी रियाज इकबाल भी मौजूद थे। इस बार डेढ़ घंटे गोली चलीं। इस बार गौरी यादव गैंग का 65 हजार का इनामी डकैत भोला यादव को पुलिस ने मार गिराया। यह मुठभेड़ चित्रकूट जनपद सीमा से सटे बटोही के जंगल में हुई थी।
  • फिर 30 मार्च 2021 को बहिलपुरवा थाना के जंगल में पुलिस और गौरी की आमने सामने मुठभेड़ हुई, जिसमें करीब 1 घंटा दोनों ओर से गोलियां चलीं। इसके बाद गौरीगंज के 30 हजार के इनामी भालचंद्र पुत्र राम अवतार यादव को पुलिस ने मार गिराया।

ऐसे बढ़ता गया अपराधों का ग्राफ
दरोगा सहित तीन गांव वालों को गोलियों से भूनने के बाद साल 2016 में उत्तर प्रदेश के डीजीपी जावेद अहमद ने गौरी पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। तक उसके खिलाफ चित्रकूट जनपद से सटी सीमा सतना मध्य प्रदेश में भी कई मुकदमे दर्ज थे। मध्य प्रदेश से भी गौरी पर 50 हजार का इनाम घोषित किया।

इसी साल गौरी यादव अपनी मां को ग्राम पंचायत का प्रधान बनवाया और मध्य प्रदेश मझगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत पडवनिया में अपने बहनोई को बंदूक की नोक पर सरपंच बनवाया। गौरी यादव के खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, अपहरण, बवाल, हत्या का प्रयास सहित उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में करीब 140 केस दर्ज हैं।

पुलिस से बचने के लिए कई बार अंडरग्राउंड हुआ
डकैत गौरी यादव कई साल से बागी है। पांच लाख इनामी डकैत बबुली कोल के मारे जाने के बाद से वह अंडरग्राउंड हो गया था लेकिन, पंचायत चुनाव के पहले फिर से उसने वारदात शुरू कर दी। बीते माह ददरी में मजदूरों को पीट कर पीडब्लूडी का सड़क निर्माण रुकवा दिया और चेकडैम बनवा रहे वन विभाग कर्मियों को भी पीटा था। वन कर्मियों ने बहिलपुरवा थाना में मुकदमा दर्ज कराया। इन घटनाओं के बाद से पुलिस लगातार गैंग पर कार्रवाई की गई है। कुछ मददगार व सदस्यों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन सरगना हाथ नहीं लगा।

गैंग के पास अत्याधुनिक हथियार
गौरी गैंग में एक दर्जन सदस्य हैं। गैंग के सदस्यों के पास अत्याधुनिक हथियार हैं। गैंग के पास से एके-47, सेमी ऑटोमेटिक से लेकर राइफल, बंदूक तथा भारी मात्रा में कारतूस का जखीरा है। पुलिस भी जंगलों में कॉम्बिंग के समय बिना पूरी तैयारी के नहीं जाती। यही वजह भी है कि गौरी का गैंग अपने हथियारों के दम पर कई बार पुलिस से मुठभेड़ कर चुका है।

चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल का कहना है कि डेढ़ लाख के इनामी डकैत गौरी के खिलाफ अभियान जारी है। कई बार इसके मददगार व सदस्य पकड़े जा चुके हैं।

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