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रस्मोरिवाज से हुई शादी को ‘अवैध’ बताईं नुसरत जहां, जानें क्या कहता है कानून

नई दिल्ली :  फिल्म ऐक्ट्रेस और बंगाल में टीएमसी की सांसद नुसरत जहां अपने पति निखिल जैन से अलग होने को लेकर चर्चा में हैं। नुसरत जहां ने बुधवार को एक बयान जारी करते हुए कहा था कि निखिल जैन के साथ उनकी शादी मान्य नहीं है। पिछले कुछ वक्‍त से नुसरत और निखिल के बीच अनबन की खबरें सामने आ रही थीं। निखिल का कहना था कि 6 महीने से नुसरत उनके साथ नहीं हैं। नुसरत की 2019 में बंगाल के बिजनसमैन निखिल जैन से शादी हुई थी।

नुसरत ने अपने बयान में कहा कि निख‍िल और उनकी शादी ‘इंटर रिलीजन’ थी। इसलिए दोनों को भारत में ‘स्पेशल मैरिज ऐक्ट’ के अंदर शादी करनी थी , जो नहीं हुई। यहां के कानून के हिसाब से यह एक शादी नहीं है, बल्कि एक रिश्ता है या यूं कहें लिव-इन रिलेशनशिप है। ऐसे में तलाक का सवाल ही नहीं उठता। नुसरत के मुताबिक, न‍िख‍िल और वो बहुत पहले ही अलग हो चुकी हैं। आइए आपको बताते हैं कि भारत में शादी के लिए क्या कानून हैं और क्या उनके मुताबिक नुसरत शादी की मान्य है या नहीं?

तुर्की में क्या हैं शादी के नियम?
तुर्की में किसी को भी अपने यहां शादी करने की मान्यता देता है भले ही वह अलग-अलग राष्ट्रीयता वाले शरणार्थी हो, राज्यविहीन व्यक्ति हों या फिर तुर्की के नागरिक हों। तुर्की में किए गए सभी विवाह तुर्की नागरिक संहिता और संबंधित नियमों के अधीन आते हैं। तुर्की में शादी के लिए आपके पास संबंधित दस्तावेज दुरुस्त होने चाहिए। यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि तुर्की में केवल आधिकारिक (नागरिक) विवाहों को कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है, जैसा कि तुर्की नागरिक संहिता के तहत परिभाषित किया गया है। हालांकि तुर्की में तलाक लेना संभव है, भले ही शादी तुर्की के बाहर हुई हो।

क्या हैं भारत में विवाह के कानून?
भारत विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों वाला देश है। ऐसे में यहां अंतरधार्मिक या अंतरजातीय विवाह की संभावना भी बनी रहती है। वहीं, इन शादियों को मान्यता देने के लिए अलग-अलग कानून बनाए गए हैं। इसके अलावा विभिन्न धर्मों के लिए व्यक्तिगत कानूनों का भी हैं। जिनमें हिंदू मैरिज ऐक्ट 1955, मुस्लिम पर्सनल लॉ 1937, भारतीय ईसाई मैरिज ऐक्ट, पारसी मैरिज डाइवोर्स ऐक्ट 1936 व स्पेशल मैरिज ऐक्ट 1954 मुख्य हैं।

क्या होता है स्पेशल मैरिज ऐक्ट?
स्पेशल मैरिज ऐक्ट को अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाह को मान्यता प्रदान करने के लिए लाया गया था। यह पंजीकरण के माध्यम से विवाह को मान्यता प्रदान करता है। इसकी विशेषता है कि इसमें दोनों पक्ष धर्म और जाति का परित्याग किए बिना ही वैवाहिक जीवन बिता सकते हैं। यह ऐक्ट सभी धर्मों और जातियों पर लागू होता है। इस कानून के तहत उत्तराधिकार का मामला भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत तय किया जाता है। यदि वैवाहिक दंपत्ति हिंदू, बौद्ध, जैन या सिख हो तो इसे हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत ही तय किया जाएगा। इसमें तलाक के लिए शादी से एक वर्ष की अवधि के बाद ही आवेदन दिया जा सकता है।

अगर शादी विदेश में हुई है तो?
विदेश में हुई किसी भी शादी को भारत में रजिस्टर कराना अनिवार्य है जिसके बाद ही उस शादी को भारत में कानूनी मान्यता मिलेगी। नुसरत जहां और निखिल जैन ने अपनी शादी को भारत में रजिस्टर नहीं कराया है। अब जब नुसरत जहां कह रही हैं कि उनके और निखिल जैन के रिश्ते को एक लिव इन रिलेशनशिप जैसा ही समझा जाए तो ऐसे केस में दोनों के पास वही सारे अधिकार होंगे जो एक लिव-इन कपल के पास होते हैं।

अगर भारत में तलाक लेना चाहें तो?
इस तरह की किसी भी शादी में तलाक के लिए पहले शादी को भारत के स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर करना होगा। उसके बाद तलाक की पूरी प्रक्रिया को फॉलो करना होगा। वहीं, बिना तलाक के अलग होने के लिए उन्हें पहले एक लॉ सूट फाइल करना होगा और फिर शादी को नल ऐंड वॉइड घोषित करने की मांग करनी होगी।

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