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Petrol-Diesel Price : पेट्रोल और डीजल अभी 5 रुपये और हो सकते हैं महंगे, पढ़े पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली।   अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) एक बार फिर 80 डॉलर के करीब पहुंच गया है। इसके साथ ही कच्चा तेल तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इससे पहले अक्तूबर 2018 में ये 78.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा था। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल के दाम पांच रुपये तक बढ़ सकते हैं। ईंधन विशेषज्ञों ने यह अनुमान जताया है। आईआईएफएल सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसीडेंट (करेंसी व एनर्जी रिसर्च) अनुज गुप्ता ने हिन्दुस्तान को बताया कि बीते एक महीने में कच्चा तेल 69.70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है।

एक महीने में कच्चे तेल में करीब 12 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमत में कमी की कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि दुनियाभर में टीकाकरण की रफ्तार तेज होने से कच्चे तेल की मांग बढ़ी है। मांग बढ़ने के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे कीमत में और तेजी आने की आंशका है। इसका असर भारतीय तेल बाजार पर पड़ना तय है। भारतीय बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमत में पांच रुपये की बढ़ोतरी आने वाले महीने में देखने को मिल सकती है। केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बताया कि दुनियाभर में कोरोना के नए मामलों में लगातार गिरावट और वैक्सीनेशन की बढ़ती रफ्तार से आर्थिक गतिविधियां खुली हैं। इससे तेल की मांग तेजी से बढ़ रही है। नतीजतन, कच्चे तेल की कीमत आसमान छू रही है।

इसके अलावा डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है इससे रुपया कमजोर हुआ है। हम अपनी कुल जरूरतों का 80% से ज्यादा क्रूड आयात करते हैं और इसे खरीदने के लिए हमें डॉलर में पेमेंट करना होता है। ऐसे में रुपए के कमजोर होने से कच्चे तेल का खर्च बढ़ रहा है। वैश्विक रिसर्च फर्म गोल्डमैन सैक्स ने कच्चे तेल का दाम साल के अंत तक 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। रिसर्च फर्म का कहना है कि कोरोना के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है।

वहीं, मांग तेजी से बढ़ी है क्योंकि डेल्टा वैरियेंट का असर पूरी दुनिया से कम हो रहा है। ऐसे में हमारा अनुमान है कि साल के अंत तक कच्चे तेल की कीमत में 10 डॉलर की बढ़ोतरी होगी। अमेरिका में भी तेल का उत्पादन प्रभावित होने से कीमत में बढ़ोतरी होने की आशंका है। अगस्त महीने में भारत का तेल आयात तीन महीने के शिखर पर पहुंच गया। वहीं, जुलाई में यह एक साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था। यह भारतीय अर्थव्यवस्था में मांग निकलने के संकेत है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में त्योहारी सीजन के देखते हुए मांग और बढ़ सकती है।

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