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सच्ची कहानी : महिला को यमुना किनारे साक्षात् दर्शन दिए श्रीकृष्ण, जानिए पूरी बात

एक बार मथुरा के निकट एक गाँव में एक छोटी लड़की रहती थी। वृन्दावन के निकट होने के कारण वहां से बहुत लोग ठाकुर जी के दर्शन को जाते थे। जब वो छोटी बच्ची 5 साल की हुई तो उसके घर वाले बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए जा रहे थे। उस समय वाहन बहुत कम थे। उनको दर्शन को जाते देख उस छोटी लड़की ने कहा “पिताजी मुझे भी अपने साथ ठाकुर जी के दर्शन के लिए ले चलो” पिताजी ने कहा बेटा अभी आप छोटे हो इतना चल नहीं पाओगे थोडा बड़ा हो जाओ तब तुम्हें साथ में ले चलेंगे।  बच्ची के मन में ठाकुर जी के प्रति बहुत प्रगाढ़ प्रेम था। वह बस उनका मन से चिंतन करती रहती थी और दुखी भी होती थी की ठाकुर जी के दर्शन को न जा सकी आज तक। गाँव में उसके सभी सहपाठी प्रभु जी के दर्शन कर चुके थे। जब वो सब ठाकुर जी के मंदिर और उनके रूप का वर्णन करते तो इस बच्ची के मन में दर्शन की ललक और भी बढ़ जाती।

समय अपने पंख लगा के बढ़ता गया। कही अवसर मिले जाने के पर शायद उसके भाग्य में ठाकुर जी के दर्शन नहीं लिखे थे। जब वो 17 साल की हुई तो उसके पिताजी को उसके विवाह की चिंता हो गयी। उसका विवाह तय हो गया सयोंग कहो य उसकी ठाकुर जी के प्रति प्रेम उसका विवाह वृन्दावन के सबसे पास वाले गाँव में हो गया।वह लड़की बहुत प्रसन्न थी की अब तो उसको भी ठाकुर जी के दर्शन होंगे। जब विवाह संपन्न हुआ तो वह अपने ससुराल गयी। फिर रस्म निभाने के लिए वापस अपने घर आई।

एक दो दिन बाद वो और उसके पति जब वापस अपने घर जा रहे तो बीच में यमुना नदी पर उसके पति बोला“तुम कुछ देर इधर बैठो में यमुना में स्नान करके आता हूँ।”उस लड़की का चिंतन अब ठाकुरजी की तरफ चला गया और सोचने लगी की कब ठाकुर जी के दर्शन होंगे। उस लड़की ने लंबा घूँघट निकाल रखा है, क्योकि गाँव है, ससुराल है, और वही बैठ गई। फिर वो मन ही मन विचार करने लगी ‘कि देखो!ठाकुरजी की कितनी कृपा है। उन्हें मैंने बचपन से भजा और दर्शन के लिए लालायित थी, उनकी कृपा से अब मेरा विवाह श्रीधाम वृंदावन में ही हो गया।

पर मैं इतने सालों से ठाकुरजी को मानती हूँ पर अब तक उनसे कोई भी रिश्ता नहीं जोड़ा ?” फिर सोचने लगी “ठाकुरजी की उम्र क्या हो सकती है ? “मेरे हिसाब से लगभग 17 वर्ष के ही होंगे, मेरे पति 21 वर्ष के है, उनसे थोड़े ही छोटे होंगे, इसलिए वो मेरे पति के छोटे भाई की तरह हुए तो मेरे देवर की तरह, लो आज से ठाकुरजी मेरे देवर होंगे।” अब तो ठाकुरजी से नया सम्बन्ध जोड़कर उसको बहुत प्रसन्नता हुई और मन ही मन ठाकुरजी से कहने लगी “ठाकुर जी ! आज से मै आपकी भाभी और आप मेरे देवर हो गए, पर वो समय कब आएगा जब आप मुझे भाभी – भाभी कह कर पुकारोगे ?”

जब वो किशोरी ये सब सोच ही रही थी तभी एक किशोरवस्था का सवांला सा लड़का उधर आ गया और कहने लगा “भाभी-भाभी” लडकी अचानक अपने भाव से बाहर आई और सोचने लगी “वृंदावन में तो मै नई हूँ ये भाभी कहकर कौन बुला रहा है ?” वो नई थी इसलिए घूँघट उठाकर भी नहीं देखा कि गाँव के किसी बड़े-बूढ़े ने देख लिया तो बड़ी बदनामी होगी । जब वह बालक बार – बार कहता पर वह उत्तर ही न देती। बालक उसके और पास आया और कहा “ भाभी! नेक अपना चेहरा तो देखाय दे”। अब वह सोचने लगी “ अरे ये बालक तो बहुत जिद कर रहा है।” इसलिए उसने और कस के अपना घूँघट पकड़कर बैठ गई कि कही घूँघट उठाकर देख न ले।

फिर उस बालक ने कहा “भाभी आपने ये पर्दा क्यों कर रखा हैं हम तो आपके देवर है।ये सुनकर किशोरी ने कहा “जब कह दिया न हम आपको नहीं जानते, इनको पता चल गया तो बहुत मार पड़ेगी”“भाभी आप तो नाराज़ हो रही हो, देखो हम आपके इतने प्यारे देवर है आप से मिलने के लिए इतनी दूर तक आ गए और आप हो की बात भी नहीं कर रहे हो। क्यों आप हम से मिलना नहीं चाहते थे।और इतना कहते ही उस लड़के ने घूंघट खींच लिया और चेहरा देखा और भाग गया। थोड़ी देर में उसका पति भी आ गया, उसने अपने पति को सब बात कही।पति बोला अरे तुम इतना परेशान मत हो क्योंकि वृन्दावन ज्यादा बड़ा नहीं है और कभी न कभी वो बालक हमे किसी न किसी गली ने नजर आ ही जायेगा और फिर मै उसे अच्छे से सबक सिखा दूंगा बस तुम्हे जब भी कभी वो दोबारा नजर आये तो मुझे जरुर बताना और फिर दोनों घर की ओर चल दिए|

कुछ दिन बीत चुके थे एक दिन लडके की माँ ने लड़के से कहा की बेटा तुम दोनोंका विवाह हो चूका है औए अब तो बहु अपने मायके से भी हो आई है तो क्यों  न तुम दोनों जाकर श्री बांके बिहारीजी के दर्शन कर आओ तब लड़के ने कहा ठीक है माँ हम कल ही जाकर दर्शन कर लेंगे |
अगले दिन दोनों पति और पत्नी ठाकुर जी के दर्शन के लिए मंदिर जाते है | लडकी घुंघट में ही थी तभी उसका पति उसके पीछे आया और बोला घुंघट उपर कर लो वरना भगवान के दर्शन कैसे करोगी|

जब नयी दुल्हन ने अपना घूँघट उठाया और बाँके बिहारी जी की ओर देखा तो बाँके बिहारी जी के स्थान पर वही बालक मुस्कुराता हुआ दिखा जो उसे यमुना तट पर भाभी बोल रहा था |उस बालक को श्री कृष्ण के स्थान पर देखने के बाद वो अपने पति को  जोर जोर से आवाज लगाकर बुलाने लगी और जब पति आया और पूछा क्या हुआ तो उसने बताया की उस दिन जो मुझे भाभी-भाभी कह कर भागा था न वह लड़का मिल गया”।

पति ने तुरंत पूछा कहा है बताओ मुझे तब पत्नी ने ठाकुर जी के तरफ इशारा करते हुए कहा ये वही बालक है जो हमारे सामने है और जब पति ने  सामने देखा तो वो हैरान रह गया क्योंकि वो बालक कोई और नहीं बल्कि खुद ठाकुर जी थे और ये देखते ही वो अपनी पत्नी किए चरणों  में गिर गया और बोला “तुम बहुत ही धन्य हो वास्तव में तुम्हारे ह्रदय में सच्चाभाव ठाकुरजी के प्रति है। हम इतने वर्षों से वृंदावन में है पर आज तक हमें उनके दर्शन नहीं हुए और तेरा भाव इतना उच्च है कि ठाकुर जी ने तुझे दर्शन दे दिए।”

इस कहानी को पढने के  बाद आपको भी ये विश्वास तो जरुर हो गया होगा की ठाकुर जी अपने भक्तों को हमेशा याद रखते है और आप जिस भी रूप में उन्हें देखना चाहते है वो उस रूप में आपसे रिश्ता जरुर निभाते है जैसे इस कहानी में ठाकुरजी ने देवर का सबंध निभाया

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