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Sawan 2021: सावन के पहले सोमवार को बन रहे विशेष योग, ऐसे करें पूजा

लखनऊ : भगवान शिव का माह कहा जाने वाला सावन महीना पंचांग के अनुसार 25 जुलाई, रविवार से आरंभ हो गया है. हिंदू धर्म में सावन या श्रावण मास की विशेष महिमा है. सावन का महीना धार्मिक कार्य और पूजा पाठ के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है.

इस पवित्र श्रावण मास में भगवान शंकर की पूजा की जाती है. इससे जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. सावन माह में भगवान शिव के अलग अलग स्वरूप की पूजा भक्त करते हैं. सावन में भक्त पवित्र कांवड यात्रा निकाल कर भगवान शिव को प्रसन्न करते हैं. हालांकि इस बार कोरोना के कारण प्रदेश में कांवड यात्रा पर रोक लगा दी गई है.

महादेव की उपासना का माह

सावन का संपूर्ण महीना भगवान शिव की उपासना के लिए अतिउत्तम माना गया है. यही कारण है कि शिवभक्त इस महीने का पूरे साल भर इंतजार करते हैं. धार्मिक ग्रंथों में सावन माह में भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत ही फलदायी बताया गया है इसलिए सावन में लोग रुद्राभिषेक कर पुण्यलाभ प्राप्त करते हैं.

हिन्दू पंचांग के मुताबिक, सावन का प्रारंभ आषाढ़ पूर्णिमा या गुरु पूर्णिमा के अगले दिन से होता है. सावन माह हिन्दू पंचांग के अनुसार साल का 5वां माह होता है. इस बार सावन माह 25 जुलाई रविवार से प्रारंभ हो गया है. इसका समापन 22 अगस्त दिन रविवार को होगा.

शिवजी का सोमवार बेहद पसंद

वैसे तो पूरे सावन माह के बहुत पवित्र माना जाता है, लेकिन सावन माह के सोमवार का विशेष महात्म्य माना जाता है. कहा जाता है कि सावन के सोमवार भगवान शिव को बेहद पसंद हैं. इस बार सावन में 4 सोमवार व्रत पड़ रहे हैं. 26 जुलाई को पहला सोमवार पड़ रहा है. इस दिन भगवान भोलेनाथ की विधि पूर्वक विशेष पूजा करने का विधान बताया गया है.

सोमवार को यह शुभाशुभ योग

ज्योतिष के अनुसार 26 जुलाई को सावन का पहला सोमवार है और इस दिन सौभाग्य योग बन रहा है. 2 अगस्त को दूसरा सोमवार है और इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है. 9 अगस्त को सावन का तीसरा सोमवार है और इस दिन वरीयान योग बन रहा है. 16 अगस्त को सावन का चौथा व अंतिम सोमवार है और इस दिन सर्वार्थ सिद्धि व ब्रह्म योग बन रहा है, जो कि शुभाशुभ फल देने वाला है.

सावन से चातुर्मास का प्रारंभ

श्रावण माह से व्रत और साधना के चार माह अर्थात चातुर्मास प्रारंभ होते हैं. पौराणिक कथा के अनुसार देवी सती ने अपने दूसरे जन्म में शिव को प्राप्त करने हेतु युवावस्था में श्रावण महीने में कठोर व्रत किया और उन्हें प्रसन्न किया. इसलिए यह माह शिव जी को साधना, व्रत करके प्रसन्न करने का माना जाता है. श्रावण शब्द श्रवण से बना है जिसका अर्थ है सुनना. अर्थात सुनकर धर्म को समझना.

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