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शास्त्र : कलयुग के इस पाप के कारण हुआ कोरोना, क्या ये है दुनिया का अंत ?

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से हाहाकार मची हुई है। ऐसे में अधिकतर लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है की क्या हिन्दू धर्म शास्त्रों में की गयी भविष्यवाणी के अनुसार कलयुग के अंत का समय निकट आ गया है।  क्यूंकि सोशल मीडिया पर कई ज्योतिष के जानकार ये दावा कर रहे हैं की आज से करीब दस हजार साल पहले ही हिन्दू धर्मग्रंथों में इस बात का वर्णन मिला है की पूर्व के देश से कोई महामारी जन्म लेगी जो पूरे विश्व को तबाह कर देगी। लेकिन मित्रों घबराने की जरूरत नहीं है इस पोस्ट में हम लोगों के मन में उठ रहे उन सवालों के जवाब देने जा रहे जो जाने अनजाने आप सभी के मन में उठ रहे हैं।

पाठकों आपको बता दूँ की सोशल मीडिया पर कई ज्योतिष के जानकारों का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमे ये दावा किया जा रहा की हिन्दू धर्मग्रंथों में से एक नारद संहिता में आज से करीब दस हजार साल पहले ही इस बात का उल्लेख किया जा चूका है की भारत के पूर्व की और बसे किसी देश से महामारी की शुरुआत होगी जिससे पूरी दुनिया तबाह हो जाएगी। कुछ लोग इसे कलयुग का अंत बता रहे हैं।

मित्रों हम आपको बता दें की हिन्दू धर्मशास्त्रों में ही वर्णित कथा के अनुसार कलयुग के अंत होने में अभी काफी समय बांकी है। क्यूंकि ब्रह्म पुराण के अनुसार कलयुग का काल 4,32,000 साल लंबा है।और अभी कलयुग का प्रथम चरण ही चल रहा।ऐसा माना जाता है की कलयुग का प्रारंभ 3102 ईसा पूर्व से हुआ था । इसका अर्थ यह हुआ की कलयुग के अब तक सिर्फ  5120 वर्ष बीते हैं और 426880 वर्ष अभी भी इस युग के बाकी है। परन्तु कलियुग का अंत कैसा होगा इसका वर्णन भी ब्रह्मपुराण में किया गया है। ब्रह्मपुराण के अनुसार कलियुग के अंत में मनुष्य की आयु महज 12 वर्ष रह जाएगी। इस दौरान लोगों में द्धेष और दुर्भावना बढ़ेगी। कलयुग की उम्र जैसे जैसे बढती जाएगी वैसे वैसे नदियां सूखती जाएगी।बेमानीऔर अन्याय से धन कमानेवाले लोगों में बढ़ोत्तरी होगी।धन के लोभ में मनुष्य किसी की हत्या करने में भी संकोच नहीं करेंगा।

मनुष्य पूजा-पाठ, व्रत-उपवास और सभी धार्मिक काम करना बंद कर देंगे।गाय दूध देना बंद कर देगी। मानवता नष्ट हो जाएगी।लड़कियां बिलकुल भी सुरक्षित नहीं रहेंगी उनका अपने ही घर में सोशन होगा अपने ही घर के लोग उनके साथ व्यभिचार करेंगे, बाप बेटी भाई बहन कोई रिश्ते नहीं रह जायेंगे। एक भाई दूसरे भाई का ही शत्रु हो जाएगा। शादी जैसा पवित्र रिश्ता अपवित्र हो जायेगा । किसी की भी शादी शुदा जिंदगी ठीक से नहीं चलेगी,पति पत्नी एक दूसरे से बेवफाई करेंगे,कलियुग में समाज हिंसक हो जाएगा। जो लोग बलवान होंगे उनका ही राज चलेगा।और जब आतंक अपनी चरम सीमा में होगा तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेंगे और पृथ्वी से समस्त अधर्मियों का नाश कर देंगे।

इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण ने भी बताया है की कलियुग का अंत कैसे होगा।जिसका वर्णन महाभारत में मिलता है। जिसके अनुसार कलियुग में ऐसे लोगों का राज होगा जो बोलेंगे कुछ और करेंगे कुछ। इतना ही नहीं कलियुग में ऐसे लोग रहेंगे, जो बड़े ज्ञानी और ध्यानी कहलाएंगे लेकिन उनके आचरण राक्षसी होंगे। कलयुग में सन्तानो के लिए माँ की ममता इतनी बढ़  जाएगी कि उन्हें अपने विकास का अवसर ही नहीं मिलेगा। मोह-माया में ही घर बर्बाद हो जाएगा। ठीक इसी तरह कलयुग में अन्न के भंडार तो होंगे लेकिन लोग भूख से मरेंगे। महलों में एशो आराम चल रहा होगा लेकिन झोपड़ी में आदमी भूख से मर जाएगा।

एक ही जगह पर असमानता अपने चरम पर होगी।कलयुग के अंत के समय बड़े-बड़े भयंकर युद्ध होंगे, भारी वर्षा, प्रचंड आंधी और जोरों की गर्मी पड़ेगी। लोग खेती काट लेंगे, कपड़े चुरा लेंगे, पानी पीने का सामान और पेटियां भी चुरा ले जाएंगे। चोर अपने ही जैसे चोरों की संपत्ति चुराने लगेंगे। हत्यारों की भी हत्या होने लगेगी, चोरों से चोरों  का नाश हो जाने के कारण जनता का कल्याण होगा। युगान्त्काल में मनुष्यों की आयु अधिक से अधिक 12 वर्ष की होगी। लोग दुर्बल, क्रोध-लोभ, तथा बुड़ापे और शोक से ग्रस्त होंगे। उस समय रोगों के कारण इन्द्रियां क्षीण हो जाएंगी।

भगवान कहते हैं  इसके बाद कलयुग में जब पाप अपने चरम पर पहुँच जाएगा और पृथ्वीलोक से धर्म समाप्त होने लगेगा तब मैं कल्कि रूप में अवतरित हो कर इस धरा को पापों से मुक्त करूँगा और उसके बाद जो नया युग आएगा सतयुग कहलायेगा।अर्थात सृष्टि युग परिवर्तन का बाईसवां चक्र पूर कर के तेइसवें चक्र में प्रवेश करेगी और फिर से नवयुग आरम्भ होगा जो सतयुग के नाम से जाना जाएगा।इसलिए मित्रों घबराने की जरूरत नहीं है क्यूंकि कलयुग की समाप्ति में अभी लम्बा वक्त है।

रही बात कोरोना वायरस की तो आपको बता दें की ये पहली बार नहीं है जब किसी बिमारी ने दुनिया में महामारी की रूप लिया है। 1770 में रशियन प्लेग और 1920 में स्पेनिश फ्लू जैसी बीमारियों ने मानवता के सामने अस्तित्व का खतरा पैदा किया है लेकिन ज़िन्दगी हमेशा बिमारी से जीती है और इसलिए इस बार भी जीत अवश्य ही मानवता और जीवन की ही होगी।

 

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