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Sneha Dubey : कौन है भारत की वो अफसर बिटिया, जिसने UN में उड़ा दी इमरान खान की धज्जियां

भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के देश के खिलाफ तीखे हमले के जवाब में पाकिस्तान को आतंकवाद का संरक्षक और अल्पसंख्यकों का दमन करने वाला बताया. यूएन जनरल असेंबली (United Nation General Assembly) जहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान (Pak PM Imran Khan) वर्चुअली संबोधन कर चुके थे. हमेशा की तरह उन्होंने कश्मीर (Kashmir) का राग अलापा और खुद को आतंकवाद का सबसे बड़ा पीड़ित बताया. लेकिन, हमेशा की तरह भारत की ओर से पाकिस्तान को एक बार फिर मुंहतोड़ जवाब मिला. भारत की पहली सचिव स्नेहा दुबे (India First Secretory Sneha Dubey) ने राइट टू रिप्लाई (Right to Reply) के तहत पाकिस्तान को करारा जवाब दे डाला.

स्नेहा दुबे ने इमरान खान को फटकार लगाते हुए पाकिस्तान की पोल खोल डाली और कहा, कि ये पहला मौका नहीं जब पाक नेता ने यूएन के मंच का इस्तेमाल मेरे देश के खिलाफ झूठा और गलत प्रचार करने के लिए किया है. उन्होंने कहा, कि वह (पाकिस्तान) आतंकवाद का हिमायती है. मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पनाह मिली थी. वह उसे शहीद का दर्जा देता है. वह अपने घर में आतंकी सिर्फ इसलिए पालता है कि वह अपने पड़ोसियों को नुकसान पहुंचा सके. स्नेहा दुबे ने तंज कसते हुए कहा, कि हम सुनते रहते हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद का शिकार है. आग लगाने वाला पाक नकाब पहनकर खुद को फायर फाइटर बता रहा है.

पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को फटकार लगाने स्नेहा 2012 बैच की आईएफएस अफसर हैं. उन्होंने पहले प्रयास में ही UPSC में सफलता पाई थी. आईएफएस बनने के बाद उन्हें विदेश मंत्रालय में नियुक्त मिली. 2014 में भारतीय दूतावास मैड्रिड में भेजा गया. वर्तमान में वह संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत की प्रथम सचिव हैं. स्नेहा ने जेएनयू से पढ़ाई की है. उन्होंने यहां से एमए और एफफिल किया है. उनकी शुरुआती शिक्षा गोवा में और फिर पुणे के फर्ग्युसन कॉलेज से ग्रेजुएट किया. उनकी फैमिली में वह पहली सिविल सेवा अफसर हैं.

यूएन महासभा में भारत की प्रथम सचिव स्नेहा दुबे ने कहा, कई देशों को यह जानकारी है कि पाकिस्तान का आतंकियों को पनाह देने, उन्हें सक्रिय रूप सक्रिय रूप से समर्थन देने का इतिहास रहा है. यह उनकी नीति है. यह एक ऐसा देश है, जिसे विश्व स्तर पर आतंकियों को समर्थन देने, हथियार उपलब्ध कराने और आर्थिक मदद करने के रूप में पहचान मिली है.

बता दें कि इमरान खान इस बार न्यूयॉर्क नहीं आए. उन्होंने पाकिस्तान से ही वर्चुअली संबोधन के दौरान कश्मीर का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ शांति चाहता है, दक्षिण एशिया में स्थायी शांति जम्मू-कश्मीर विवाद के समाधान पर निर्भर है.

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