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अखिलेश ने बागी नेताओं के लिए खोला द्वार, नारद-अंबिका के बाद वापसी करेंगे शिवपाल!

लखनऊ. समाजवादी पार्टी मिशन- 2022 में जुट गई है। ऐसे में पार्टी ने अपने दरवाजे जिताऊ नेताओं के लिए खोल दिए हैं। अब पार्टी में वह नेता भी वापस हो रहे हैं। जो यादव परिवार की कलह में पार्टी से खेमेबाजी के चलते निकाल दिए गए थे। 2017 के बाद से 2021 के बीच पार्टी में ऐसे कई नेताओं ने वापसी की है। बड़े नामों में नारद राय और अंबिका चौधरी शामिल हैं। इनके अलावा जनवरी 2021 से जून 2021 तक लगभग 100 से ज्यादा नेता समाजवादी पार्टी ज्वाइन कर चुके हैं। हालांकि, अब सबकी निगाहें शिवपाल यादव पर टिकी हैं कि भविष्य में वह क्या फैसला लेते हैं।

बसपा के 6 विधायक सपा के संपर्क में
सपा में आने वाले नेताओं में बसपा नेताओं की बड़ी संख्या है। अभी हाल ही बसपा से अंबिका चौधरी ने भी इस्तीफा दिया। साथ ही बसपा के 6 विधायक समाजवादी पार्टी के संपर्क में बने हुए हैं। प्रदेश से लगभग 50 से ज्यादा नेताओं की सपा में एंट्री हुई है। दरअसल, बसपा नेताओं को लग रहा है कि बसपा डूबती हुई नाव है। ऐसे में भाजपा के मुकाबले उन्हें सपा ही लड़ाई में दिख रही है। यही वजह है कि अन्य पार्टियों के बागी सपा का रुख कर रहे हैं। इनमे वह नेता भी शामिल हैं जिन्होंने समाजवादी पार्टी पूर्व में छोड़ी थी।

यह उन बड़े नेताओं की लिस्ट है। जिन्हें यादव परिवार के कलह के बीच खेमेबाजी के चलते पार्टी से बाहर कर दिया गया था।

शिवपाल और उनके करीबियों की हो सकती है वापसी
इस बात से कोई इंकार फिलहाल नहीं कर रहा है। सपा नेताओं का कहना है कि चुनाव नजदीक आने दीजिए। फिलहाल, बीते दिनों में शिवपाल यादव ने कई बार सपा से गठजोड़ के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा था कि सपा हमें सम्मानजनक सीट विधानसभा चुनावों में देती है तो गठबंधन हो सकता है। वहीं अखिलेश यादव ने भी उन्हें इटावा की जसवंतनगर विधानसभा सीट देने का एलान किया था। हालांकि, अभी भी इससे आगे बात नही बढ़ी है। बहरहाल, अब सबकी निगाहें शिवपाल यादव की ओर लगी है कि वह कब घर वापसी करेंगे।

बलिया के दो बड़े नेताओं ने छोड़ी थी सपा
बलिया को बागियों की धरती कहा जाता है। अंबिका चौधरी भी वहीं से आते हैं। यादव परिवार के झगड़े में अंबिका चौधरी शिवपाल यादव के साथ खड़े थे। ऐसे में जब अखिलेश यादव के पास पार्टी की कमान आयी तो उन्होंने शिवपाल के साथ साथ उनके साथियों को भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। अंबिका चौधरी मुलायम की किचन कैबिनेट के प्रमुख सदस्य माने जाते रहे हैं। 2017 में सपा से बाहर हुए अंबिका चौधरी अब 2021 में सपा में फिर से वापसी कर सकते हैं।

बलिया में कितने मजबूत हैं अंबिका चौधरी?
सपा के संस्थापक सदस्य रहे अंबिका चौधरी मुलायम-शिवपाल के खास रहे हैं। हालांकि 2017 विधानसभा चुनाव में उनका बहुत अच्छा रिजल्ट नही रहा। लेकिन बलिया में उनका एक वोट बैंक बना हुआ है। अंबिका चौधरी बलिया की फेफना विधानसभा सीट से लगातार लगातार 4 बार विधायक भी रहे हैं। फिलहाल 2012 और 2017 विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। हालांकि, बताया जा रहा है कि अंबिका की सपा के साथ बढ़ती करीबियों के पीछे का कारण रामगोविंद चौधरी के बेटे का जिला पंचायत सदस्य चुनाव हार जाना है। जबकि अंबिका का बेटा जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव जीत गया था। ऐसे में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अंबिका की वापसी के लिए तैयार किया गया।

नारद राय भी सपा को पहुंचाएंगे फायदा?
समाजवादी पार्टी में छोटे लोहिया के नाम से मशहूर जनेश्वर मिश्रा के ख़ास नारद राय भी सपा संस्थापक रहे हैं। नारद राय भी मुलायम शिवपाल के ख़ास माने जाते रहे हैं। ऐसे में अखिलेश यादव के हाथ में जब पार्टी की कमान आई तो उनका टिकट भी कटा। नारद ने भी बसपा ज्वाइन कर बलिया सदर सीट से चुनाव लड़ा लेकिन वह भाजपा के अनंत स्वरुप शुक्ला से हार गए। बसपा ज्वाइन करने के 9 महीने बाद ही नारद राय ने बसपा छोड़ दी थी। अब वह सपा में हैं।

बलिया के स्थानीय नेताओं को है गुटबाजी का डर

स्थानीय सपा नेता धनंजय सिंह विशेन कहते हैं कि यह दोनों बड़े नेता हैं। कुछ दिनों के लिए पार्टी से बाहर थे अब आये हैं तो मजबूती तो मिलेगी ही। हां, अब पहले की तरह गुटबाजी न हो तो बलिया में एक बार फिर सपा का प्रदर्शन सुधर सकता है। उन्होंने बताया कि जिले में रामगोविंद चौधरी, अंबिका चौधरी और नारद राय सपा के दिग्गज नेता हैं। रामगोविंद चौधरी और इन दोनों में आपस में बनती नहीं है। ऐसे में एक बार फिर बलिया गुटबाजी का शिकार न हो जाए।

इनसे सपा को नहीं होगा बहुत फायदा
एक सीनियर कहते हैं कि अंबिका चौधरी हो या फिर नारद राय इन दोनों के पार्टी में आने से कोई बहुत फायदा पार्टी को बलिया में नहीं होना है। यह दोनों ही अपनी सीट जीतते रहे हैं। ऐसे में यह अपनी सीट निकाल सकते हैं लेकिन किसी और सीट पर बहुत असर नहीं डाल पाएंगे। दरअसल, दोनों लंबे समय तक सपा में रहे हैं। ऐसे में उनके नाम पर जो वोटबैंक है वह पहले से बना हुआ है। यही किसी अन्य जाति का नेता पार्टी में शामिल होता तो पार्टी का वोट बैंक बढ़ता। जोकि अभी नहीं बढ़ेगा। बलिया में सपा को बस यही फायदा होगा कि यदि भाजपा की 2017 जैसी लहर न चली तो बलिया में 2 सीटों का फायदा मिल सकता है।

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