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सेना में तैयार हो रही जांबाजों की ऐसी टुकड़ी, जिनके लिए कुछ भी असंभव नहीं!

नई दिल्ली
मॉडर्न वार में मास्टर इंटीग्रेडट बैटल ग्रुप अगले साल तक इंडियन आर्मी का हिस्सा हो जाएगी। इंडियन आर्मी ने अपनी पश्चिमी और पूर्वी सीमाओं की सुरक्षा के लिए 11 से 13 इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप बनाने और तैनात करने की योजना बनाई है। भारतीय सेना पाकिस्तान बॉर्डर पर इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) तैनात करने करने को पूरी तरह तैयार है।

हर फील्ड के माहिर जवान होंगे शामिल
आईबीजी में अलग-अलग फील्ड के माहिर जवान होंगे। इसमें पैदल सैनिक, टैंक, तोप, इंजीनियर्स, लॉजिस्टिक, सपोर्ट यूनिट सहित वह सभी फील्ड के सैनिक एक साथ होंगे जो किसी भी युद्ध के लिए जरूरी हैं। अब तक यह सब अलग अलग यूनिट के तौर पर तैनात हैं और युद्ध के वक्त एक साथ आते हैं। प्रतिरक्षा हो या आक्रमण, युद्ध जैसी किसी भी स्थिति से तुरंत निबटने में यह दस्ता हर क्षण तत्पर रहेगा। आवश्यकता पड़ते ही तुरंत धावा बोल देना इसकी सबसे बड़ी खूबी है। यानी तैयारी या रणनीति बनाने के लिए कोई अतिरिक्त समय की इसे आवश्यकता नहीं पड़ेगी, बस आदेश मिलने की ही देर होगी।

फाइटरों को दी जा रही है स्पेशल ट्रेनिंग
सीमा से सटे हर क्षेत्र में दुश्मन के खतरे, वहां की भौगोलिक चुनौतियों और लक्ष्य (3टी- थ्रेट, टेरेन और टास्क) को ध्यान में रखकर इसके फाइटरों को स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है। इस ग्रुप में परिस्थितियों के अनुकूल साजोसामान से भी सुसज्जित किया गया है। आइबीजी का आकार किसी भी सैन्य ब्रिगेड से बड़ा और किसी डिवीजन से थोड़ा कम होगा। इसमें शामिल अधिकारियों, जवानों की संख्या क्षेत्रीय और ऑपरेशन की आवश्यकताओं के अनुरूप तय की जाएगी। आइबीजी की कमान मेजर जनरल रैंक के एक अधिकारी के पास होगी और वह संबधित कोर के जीओसी के अधीन होगा।

टास्क और भौगोलिक परिस्थिति के हिसाब होगा ग्रुप
सबसे पहले 8 आईबीजी को 9 कॉर्प्स (योल हेडक्वार्टर), 17 कॉर्प्स, (पानागढ़) और 33 कॉर्प्स (सुकना) के अंतर्गत लाया जाएगा। आईबीजी ज्यादा मारक होगा और इसका ढांचा टास्क और भौगोलिक परिस्थिति के हिसाब से होगा। जैसे जहां रोड हैं वहां कंस्ट्रक्शन की जरूरत कम है तो वहां का ढांचा अलग होगा, रेगिस्तान में जहां रोड भी बनानी हैं वहां का ढांचा अलग। आईबीजी का उद्देश्य जंग होने की स्थिति में प्रो-एक्टिव वॉर स्ट्रेटेजी या कोल्ड वॉर स्ट्रेटजी के तहत जल्द से जल्द एकजुट कर दुश्मन पर हमला करना है।

बदल गया है युद्ध का तरीका
आर्मी के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि वक्त के साथ परिस्थितियां बदली हैं और युद्ध का तरीका भी। अब हथियार सिस्टम ज्यादा घातक हो गए हैं और ज्यादा तकनीक आ गई हैं। युद्ध के मैदान की ट्रांसपेरेंसी भी बढ़ी है इसलिए अब दुश्मन को एक साथ बड़ा टारगेट देने का रिस्क नहीं लिया जा सकता। अब छोटे साइज की फॉर्मेशन ज्यादा सही रणनीति है। छोटा फॉर्मेशन होने पर वह जल्दी छुप सकता है और कम से कम नुकसान होगा।

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