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UP की पॉलिटिक्स में PM मोदी के करीबी की एंट्री, बने बीजेपी प्रदेश उपाध्यक्ष

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा संगठन में बड़ी नियुक्तियां की गई हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने शनिवार को पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए एक प्रदेश उपाध्यक्ष, 2 प्रदेश मंत्री (सचिव) और 7 मोर्चा अध्यक्ष नियुक्त किए हैं।

नई नियुक्तियों के तहत प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के 18 साल से भरोसेमंद रहे रिटायर्ड आईएएस अफसर और MLC अरविंद कुमार शर्मा को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। शर्मा को संगठन और सरकार में जगह देने के लिए पिछले कुछ समय से अटकलों का बाजार गर्म था।

इसके साथ ही शनिवार को पार्टी के 7 विभिन्न मोर्चों के प्रदेश अध्यक्षों की घोषणा भी की गई है। प्रियांशु दत्त द्विवेदी (फर्रूखाबाद) को युवा मोर्चा, गीता शाक्य राज्यसभा सांसद (औरैया) को महिला मोर्चा, कामेश्वर सिंह (गोरखपुर) को किसान मोर्चा, नरेन्द्र कश्यप पूर्व सांसद (गाजियाबाद) को पिछड़ा वर्ग मोर्चा, कौशल किशोर सांसद को अनुसूचित जाति मोर्चा, संजय गोण्ड (गोरखपुर) को अनुसूचित जनजाति मोर्चा व कुंवर बासित अली (मेरठ) को अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया है।

टाटा नैनो को गुजरात लाने में अहम भूमिका
अरविंद शर्मा का जन्म उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में 11 अप्रैल 1962 को हुआ। 1988 बैच के गुजरात कैडर के IAS शर्मा ने पॉलिटिकल साइंस में फर्स्ट क्लास से मास्टर्स किया। टाटा नैनो को गुजरात लाने, राज्य में निवेश और वाइब्रेंट गुजरात समिट के आयोजनों में इनकी भूमिका अहम रही। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से मास्टर ऑफ पब्लिक पॉलिसी और अमेरिका से स्ट्रक्चरिंग टैरिफ की ट्रेनिंग भी ली है।

18 साल से मोदी के भरोसेमंद
‘एके’ के नाम से पहचाने जाने वाले शर्मा के बारे में मशहूर है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्वस्त ब्यूरोक्रेट्स में से एक हैं। बीते 18 साल से मोदी के भरोसेमंद हैं। जून 2014 से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर आने वाले शर्मा PMO में ज्वॉइंट सेक्रेटरी बनाए गए थे। 2017 में उन्हें एडिशनल सेक्रेटरी बनाया गया।

एके शर्मा को लेकर अटकलों का बाजार गर्म था
उत्तर प्रदेश के विधान परिषद सदस्य और पूर्व आईएएस अरविंद कुमार शर्मा को लेकर फिर से अटकलों का बाजार गर्म था। दरअसल अरविंद कुमार शर्मा ने जब भाजपा ज्वॉइन की थी तभी से अटकलें लग रही थी कि उन्हें यूपी में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी, लेकिन उसके बाद कोरोना महामारी ने विकराल रूप ले लिया और योगी कैबिनेट का विस्तार नहीं हुआ। अब फिर से इसी तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

महामारी के दौरान वाराणसी समेत कई जिलों में काम किया
एके शर्मा काशी व पूर्वांचल के आसपास कोविड नियंत्रण से जुड़ी रणनीति बनाने व उसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। पीएम मोदी के करीबी माने जाने वाले एके शर्मा कोविड की दूसरी लहर में लगातार सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

केवल वाराणसी ही नहीं बल्कि पूर्वांचल के अन्य 20 से ज्यादा जिलों में भी लगातार एक्टिव हैं। वाराणसी में कोरोना की रोकथाम को लेकर वे लगातार काशी में डेरा जमाए हुए हैं और स्थिति को काबू में करने के लिए प्रयास कर रहे थे।

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