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UP में कोरोना : राहत- 23 दिन बाद सबसे कम बढ़े एक्टिव केस; आफत- 1 डिस्चार्ज तो 100 भर्ती को तैयार

उत्तर प्रदेश में बीते 24 घंटे में 32,993 नए संक्रमित मिले। हालांकि राहत की बात है कि रिकॉर्ड 30,398 मरीज ठीक भी हुए। संक्रमण को मात देने वालों का यह आंकड़ा अब तक का सबसे ज्यादा है। एक्टिव केस में महज 2,595 की बढ़त हुई है। इससे पहले बीते तीन अप्रैल को 2,423 एक्टिव केस बढ़े थे।

लेकिन कोरोना संक्रमितों को इलाज, ऑक्सीजन और दवाओं के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। यदि राजधानी लखनऊ की बात करें यहां हालात ये है कि यदि किसी अस्पताल से एक मरीज डिस्चार्ज होता है तो 100 मरीज भर्ती के लिए कतार में खड़े मिले हैं।

पिछले कई दिनों से ऑक्सीजन संकट का सामना कर रही राजधानी में ऑक्सीजन एक्सप्रेस के आगमन से सरकारी और निजी अस्पतालों को राहत मिली है। लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पा रही है। ऑक्सीजन के लिए रिफिल सेंटरों पर लंबी लाइन लग रही है।कोरोना संक्रमित या सांस रोगियों का आक्सीजन लेवल नीचे जाने पर उन्हें न निजी अस्पताल में भर्ती मिलती है और न ही सरकारी अस्पताल में। हर जगह सिर्फ एक ही बात कही जाती है कि उनके यहां बिस्तर खाली नहीं है।

परेशानी और विवशता की तीन कहानी
  1. पैकरामऊ के भाखामऊ में कोरोना संक्रमित एक महिला का आक्सीजन लेवल 71 से नीचे जाने लगा तो परिजन घबरा गए। स्वास्थ्य विभाग ने राजधानी के जिन निजी अस्पतालों को कोविड मरीजों के लिए अधिग्रहीत किया है‚ उनमें एक-एक कर परिजनों ने फोन मिलाना शुरू किया। कहीं बेड की कमी तो कहीं आक्सीजन की कमी बताई गयी। इसके बाद उन्होंने कोविड कमांड सेंटर के वॉट्सऐप नंबर पर पूरी डिटेल्स भेजी। हेल्पलाइन पर फोन किया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
  2. कोविड कमांड सेंटर से जुड़े़ एक अधिकारी बताते हैं कि गंभीर मरीजों के लिए बेड़ की दिक्कत बनी हुई है। एक डि़स्चार्ज होता है तो कई एडमिट होने को तैयार होते हैं। ऐसे में कइयों को वेटिंग पर रखना पड़ता है। बेड खाली होने पर कॉल किया जाता है।
  3. इसी तरह RT-PCR जांच का हाल है। महानगर स्थित भाऊराव देवरस अस्पताल में जांच के लिए सुबह नौ से दस बजे तक लोगों ने लाइन लगाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराया। इसके बाद दोपहर एक बजे जांच के लिए सैंपल लिये गये। इसी तरह लोहिया संस्थान और सिविल अस्पताल में जांच कराने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है। दूसरी तरफ राजधानी के नगरीय सामुदायिक केन्द्र पर एंटीजन जांच की गयी। पूछने पर मरीजों को बताया गया है कि RT-PCR जांच की किट उपलब्ध नहीं है।
KGMU ने कहा- बेड खाली होने पर ही अस्पताल आएं

प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के प्रवक्ता ने मंगलवार को कहा कि उनके यहां सभी बेड फुल हैं। ऐसे में मरीज खाली बेड होने पर ही अस्पताल आएं। इसके लिए एक लिंक साझा किया गया है। इस लिंक https://t.co/G8qwZYMH0z पर जाकर जानकारी ली सकती है। DM लखनऊ के मुताबिक बुधवार 28 अप्रैल से पब्लिक व्यू लिंक के जरिए अस्पतालों में खाली और भरे हुए बेड ऑनलाइन देखे जा सकेंगे।

संस्थान कर्मियों के लिए 72 बिस्तर आरक्षित

PGI में कोरोना के संक्रमण से ग्रसित होने पर संस्थान के कर्मियों के लिए 72 बेड आरक्षित किया गया है। इधर कुछ दिनों से प्रतिदिन किसी न किसी कर्मचारी को भर्ती न मिलने पर निधन हो रहा था। इससे नाराज हो गए कर्मचारियों में रोष व्याप्त होने पर मंगलवार से कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार की धमकी दी थी। निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान ने कर्मचारी महासंघ को वार्ता के लिए बुलाया था। वार्ता में उन्होंने आदेश जारी कर दिया कि कर्मचारियों के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बना कर नाम घोषित कर दिया है। यह कमेटी कर्मचारियों को भर्ती कर इलाज तत्काल मुहैय्या कराएगी।

कमेटी के मेन लीडर एनिसिथिसिया के प्रभात तिवारी‚ प्रोफेसर आदित्य कपूर‚ प्रोफेसर गौरव अग्रवाल. प्रोफेसर सुभाष यादव‚ प्रोफेसर प्रीति दबडघाव‚ प्रोफेसर नियाज ब्लड बैंक के डाक्टर एके खेतान को शामिल किया गया। आज पूर्व नर्स माधुरी डेनियल और रसोइया के सुपर वाइजर का भी आज RCH-2 टू में निधन हो गया। वहीं PGI कर्मचारियों की कोविड की RT-PCR की जांच के लिए PMSY ब्लाक में एक काउंटर भी खोला जाएगा।

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