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UP में मौत का ‘खेला’: एक ही कब्रिस्तान में दफन 1087 लाशें, सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 358 मरे  

मेरठ। कोरोना की दूसरी लहर ने लाखों लोगों की जिंदगी असमय छीन ली। जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, वो बिलख रहे हैं। हजारों हजार बच्चे बिन मां-बाप के हो गये हैं, सैकड़ों परिवार पूरी तरह खत्म हो गये हैं, तो हजारों महिलायें जिंदगी शुरू करने से पहले ही विधवा तो अनाथ बच्चों का तो ठीक-ठीक आंकड़ा ही सामने नहीं आ पाया है। मगर इस बीच जो असल खेल हुआ है वह है आंकड़ों का छिपाने का। श्मशान की धधकती लाशें और ​कब्रिस्तान में अपनी बारी का इंतजार करतीं लाशों के वीडियो-तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुयी थीं, जो गवाही दे रही थीं तबाही के मंजर की, मगर शासन-प्रशासन है कि आंकड़े छुपाने में लगा हुआ है।

यह सिर्फ एक राज्य या ​एक शहर में नहीं, बल्कि देशभर में हुआ है। दिल्ली से सटे मेरठ में भी आंकड़ों का छुपाने का खेल प्रशासन ने बड़े शातिराना तरीके से खेला है। एनबीटी की एक खबर के मुताबिक मेरठ के सिर्फ एक कब्रिस्तान बाले मियां में पिछले 2 महीनों में एक हजार से ज्यादा लाशें दफनायी गयी हैं। कब्रिस्तान के प्रबंधक मुफ्ती अशरफ गवाह हैं कि पिछले अप्रैल और मई के दो महीनों में 1087 मुर्दों को कब्रिस्तान में दफनाया गया है, मगर प्रशासन के आंकड़ों में तो कोरोना से पिछले 2 महीनों के दौरान मेरठ में सिर्फ 358 मौतें हुयी हैं। जाहिर तौर पर देश में कोविड से होने वाली मौतों में यही आंकड़ा जुड़ता होगा।

इतनी भारी संख्या में शवों की वजह से कब्रिस्तान में जगह कम पड़ गई और कई बार कब्रिस्तान में दोबारा से मिट्टी डालने का काम भी किया गया। गौरतलब है कि वर्ष 1034 में हजरत बाले मियां कब्रिस्तान का निर्माण किया गया था, जोकि मजार के नाम से मशहूर है और मेरठ का सबसे बड़ा कब्रिस्तान माना जाता है। कब्रिस्तान का मैनेजमेंट देखने वाले प्रबंधक मुफ्ती अशरफ की मानें तो अप्रैल और मई के दो महीनों में यहां पर 1087 जनाजे लाए गए।

गौरतलब है कि हजार से भी ज्यादा लाशें जो सिर्फ एक क​​ब्रिस्तान में दफनायी गयीं, इनकी मौतें कोरोना की दूसरी लहर में हुईं थी। चूंकि इस बात का पुख्ता प्रमाण नहीं है कि ज्यादातर मौतें कोविड की वजह से हुयी थीं, तो प्रशासन इन्हें कोविड मौत मानता ही नहीं। प्रबंधक मुफ्ती अशरफ कहते हैं, जिन लोगों की घरों में मौत हुई थी, उनके परिवार वाले मौत की वजह छिपाते थे, जिस कारण इन्हें कोरोना मौतों में नहीं गिना गया। जो मुर्दे सीधे अस्पताल से कोविड प्रोटोकॉल के साथ हजरत बाले मियां कब्रिस्तान में लायी गयीं, उनकी संख्या भी सवा सौ से ज्यादा रही होगी।

वहीं मेरठ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन ने एनबीटी से हुई बातचीत में कहा, अप्रैल महीने में कोविड से होने वाली मौतों का आंकड़ा 54 है, जबकि मई महीने में ये मौतें 304 हैं। पूरे जिले में अप्रैल और मई में 358 मौतें कोरोना के चलते हुईं।

मगर दूसरी तरफ मेरठ के सिर्फ एक बड़े कब्रिस्तान में 2 महीनों में दफन 1087 लाशों का आंकड़ा चौकाने वाला है। यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि मेरठ में हजरत बाले मियां सिर्फ एक क​ब्रिस्तान नहीं है, बल्कि और भी दर्जनों कब्रिस्तान हैं। प्रबंधक द्वारा कोविड प्रोटोकाल के तहत दफनाये गये शवों की ही बात करें तो वह भी सरकारी आंकड़ों को झुठलाते हैं, क्योंकि कोविड की अस्पताल से आयीं लाशें ही सवा से ज्यादा सिर्फ एक कब्रिस्तान में थीं, तो दो महीनों में पूरे मेरठ में सिर्फ 358 मौतें कैसे हो सकती हैं। कब्रिस्तानों के अलावा श्मशानों में दिनरात धधकती लाशों का आंकड़ा तो अभी अलग ही है।

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