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वाह रे बिहार: ‘भोजपुर के चौगाई’ में हुआ अरुण शर्मा का तबादला, न चौगाई भोजपुर में है और न जिंदा हैं अरुण!

पटना. बिहार का प्रशासनिक महकमा अपने अजब गजब कारनामों के लिए आए दिन सुर्खियों में रहता है। स्वास्थ्य विभाग के बाद अब कृषि विभाग का एक कारनामा सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। एक मृत कृषि पदाधिकारी का तबादला कर दिया गया है। जबकि, उनकी मौत दो महीने पहले अप्रैल में ही कोरोना से हो चुकी है। इसके बाद भी कृषि विभाग, पटना में पोस्टेड रहे अधिकारी का तबादला भोजपुर जिले में किया गया है।

30 जून को जारी अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की लिस्ट में 15वें नंबर पर अरुण शर्मा का नाम।

पटना जिले के नौबतपुर में पदस्थापित रहे दिवंगत प्रखण्ड कृषि पदाधिकारी अरुण कुमार शर्मा का तबादला भोजपुर जिले के चौगाई में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के रूप में किया है। लेकिन सरकार को यह नहीं पता कि चौगाई, भोजपुर जिले में नहीं, बल्कि बक्सर जिले में है।

मूल रूप से नवादा के रहने वाले अरुण कुमार शर्मा का निधन कोरोना की दूसरी लहर में 27 अप्रैल को हुआ था। नौबतपुर के प्रखंड कृषि पदाधिकारी अरुण कुमार शर्मा का इलाज राजधानी पटना स्थित जक्कनपुर के श्रीराज ट्रस्ट हॉस्पिटल में चल रहा था।

बिहार में जून महीने की ताबडतोड़ ट्रांसफर-पोस्टिंग शुरू हो गई है। बीते 24 घंटे में अलग-अलग विभागों से 1541 ट्रांसफर-पोस्टिंग हो चुकी है। लगभग आधा दर्जन विभागों में हुए ट्रांसफर-पोस्टिंग में सीओ से लेकर इंजीनियर्स तक का तबादला हुआ है। आनेवाले 24 घंटों में और कई विभागों की ट्रांसफर-पोस्टिंग लिस्ट जारी होनी है।

मार्च में मृत डॉक्टर को बना दिया था सिविल सर्जन

8 मार्च 2021 को स्वास्थ्य विभाग ने 12 अधिकारियों के तबादले का नोटिस जारी किया था। नोटिस में शामिल 12 डॉक्टरों में से एक डॉक्टर रामनारायण राम की मौत हो चुकी थी, लेकिन विभाग ने उनका तबादला करने के साथ ही उन्हें प्रोमोशन भी दिया था।

भोजपुर निवासी रामनारायण राम रोहतास के बिक्रमगंज के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सा पदाधिकारी के पद पर तैनात थे। फरवरी में कोरोना की वजह से उनकी मौत हो गयी थी, लेकिन मार्च में जब डॉक्टरों के तबादले की लिस्ट जारी हुई तो बिना किसी जांच के रामनारायण राम का भी नाम लिस्ट में डाल दिया गया और उन्हें सिविल सर्जन के तौर पर शेखपुरा जिले में पदस्थापित कर दिया गया। बवाल होने पर स्वास्थ्य विभाग ने अपनी गलती मानी थी।

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