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चीन का हथियार या वाकई चमगादड़, कहां से आया कोरोना वायरस, सच तलाश लेगा भारत

भारत कोरोना वायरस के सभी ‘पहलुओं’ का आकलन कर रहा है। इस वायरस से अभी तक दुनियाभर में दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल दुनिया समेत भारत इसपर काबू पाने की कोशिश में जुटा हुआ है। सूत्रों ने बताया कि अभी तक इस वायरस की शुरुआत को लेकर कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। इसके एक जैविक हथियार के तौर पर एक्सपेरिमेंट, एक वैक्सीन के एक्सपेरिमेंट या बिना किसी मानवीय भूमिका के फैलने जैसे पहलुओं पर विशेषज्ञ विचार कर रहे हैं। इस बारे में नैशनल सिक्यॉरिटी काउंसिल सेक्रेटरिएट (NSCS) को भी पूरी जानकारी है।

NSCS के एक सूत्र ने बताया, ‘हैरान करने वाली रिपोर्ट्स और लैबोरेटरी से वायरस के फैलने के आरोपों के मद्देनजर हम सभी पहलुओं का आकलन कर रहे हैं। वायरस के लैबोरेटरी से फैलने का अभी तक कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है।’ सूत्रों ने कहा कि अभी निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय को कड़े प्रश्न पूछने और जल्द से जल्द जवाबदेही तय करने की जरूरत है। उनका कहना था कि इस मामले में वैश्विक सहमति जरूरी है। वायरस के कथित तौर पर लैबोरेटरी से फैलने पर कुछ इंटरनैशनल स्टडीज और रिपोर्ट्स को NSCS देख रहा है। इसके साथ ही इसका स्वतंत्र वैज्ञानिक आकलन भी किया जा रहा है।

विशेषत्रों ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा कि यह काम आसान नहीं है। वायरस की शुरुआत और इसके प्रभाव दोनों को समझने की कोशिश की जा रही है। देश में कुछ अकादमिक संस्थानों ने भी इस विषय पर स्टडी की है, जिसे NSCS देख रहा है। सूत्रों ने बताया कि चीन के खिलाफ चल रहे कानूनी मामलों की भी निगरानी की जा रही है। इनमें विशेषतौर पर अमेरिका में दायर किए गए कुछ कानूनी मामले शामिल हैं। इनमें अमेरिका के एडवोकेसी ग्रुप फ्रीडम वॉच की ओर से चाइनीज अथॉरिटीज के खिलाफ 20 लाख करोड़ डॉलर का मामला शामिल है, जिसमें वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के डायरेक्टर शी जेंगली पर आरोप लगाया गया है।

बहरहाल, वायरस की शुरुआत को लेकर विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। फ्रांस के नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक ल्यूक मोंटेगनिअर का दावा है कि यह एक लैबोरेटरी से आया है। बहुत से अन्य वैज्ञानिक ऐसा नहीं मानते। ल्यूक का कहना है कि एड्स के इलाज की खोज के दौरान लैबोरेटरी से यह वायरस फैला है। वायरस के अगर चीन से फैलने की पुष्टि होती है तो इससे चीन के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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